🔱"यत्र महागणपतिः, तत्र सिद्धिर्भवति निश्चितम्।"🔱
(जहाँ महा गणपति की उपासना है, वहाँ सिद्धि सुनिश्चित है।)

महा गणपति साधना – बाधा विनाश से ब्रह्मज्ञान तक का प्रवेश द्वार
महा गणपति श्रीगणेश का तांत्रिक और परमात्मस्वरूप रूप है। वे केवल विघ्नहर्ता नहीं, बल्कि ज्ञान, आत्मबोध, एवं तंत्रमार्ग के द्वारपाल हैं। श्रीविद्या, महात्रिपुरसुन्दरी, और नवावरण पूजा की किसी भी उच्च साधना से पूर्व महा गणपति साधना को अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे मूलाधार के स्वामीऔर देवी की शुद्ध इच्छा के संरक्षक हैं।
दीक्षा रूप में महा गणपति साधना:
जब साधक को महा गणपति की दीक्षा दी जाती है, तो वह केवल एक मंत्र का उच्चारण नहीं करता, बल्कि स्वयं को गणपति की चेतना में विसर्जित करता है। इस दीक्षा में साधक को एक गुप्त बीजमंत्र, तांत्रिक विनियोग, न्यास, और होम विधि प्रदान की जाती है। यह दीक्षा साधक के मूलाधार चक्रको जाग्रत करती है, जिससे कुण्डलिनी शक्ति का प्रथम स्पन्दन प्रारंभ होता है।
साधक को यह सिखाया जाता है कि गणपति केवल विघ्नों को हटाने वाले नहीं, बल्कि जिनके माध्यम से ही शुद्ध इच्छा, जप, ध्यान और पूजा सफल होती है।
महा गणपति की साधना में उनके एकदन्त, पाश, अंकुश, मोदक, वर, मुषकवाहन — सभी प्रतीकों का ध्यान कर साधक मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त पर विजय पाता है।
दीक्षित साधकों को विशेष बीजमंत्र (जैसे "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा") प्रदान किया जाता है।
ध्यान में महा गणपति को लाल वर्ण, सप्तबाहु, रक्तवस्त्रधारी, और शक्ति के साथ संयुक्त रूप में देखा जाता है।
वे देवी ललिता की आराधना के द्वारपाल और तंत्रमार्ग के साक्षात् शुभारंभ हैं।
दीक्षित साधकों को विशेष बीजमंत्र (जैसे "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा") प्रदान किया जाता है।
ध्यान में महा गणपति को लाल वर्ण, सप्तबाहु, रक्तवस्त्रधारी, और शक्ति के साथ संयुक्त रूप में देखा जाता है।
वे देवी ललिता की आराधना के द्वारपाल और तंत्रमार्ग के साक्षात् शुभारंभ हैं।
महा गणपति साधना केवल गुरु के द्वारा दी जाने वाली गुप्त दीक्षा है। यह सामान्य पूजन नहीं, बल्कि एक ऊर्जा संरचना का जागरण है। यह साधना, श्रीविद्याङ्नि पीठम् जैसे विशेष साधना-पीठों में ही सुरक्षित रखी जाती है — जहाँ साधक संरक्षित मंत्र, यंत्र और विनियोग विधियों के माध्यम से पूर्णतः शक्ति-मार्ग में प्रवेश पाता है।
गणानां त्वा गणपतिं हवामहे, कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीदसादनम्॥
(ऋग्वेद मंत्र – जो गणपति को ब्रह्मणस्पति, ज्ञान का ज्येष्ठ राजा और आह्वानकर्ता कहते हैं।)
संपर्क:
tel. -8590836425
South India: (Sept.-Feb)
Sri Vidyadni Peetham,
Vrindavan Retreat,
Rajiv Nagar-Mysore.
North India; (March-Augst)
Lotus Boulevard
Noida, Sector 100, Pin 201301.